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Debunking period taboos around the world

दुनिया भर में मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं का खंडन

मासिक धर्म से जुड़े मिथक सदियों से विभिन्न संस्कृतियों में महिलाओं के त्योहारों को मनाने के तरीके को प्रभावित करते रहे हैं।

मंदिर न जाने की हिदायत से लेकर रसोई से दूर रहने तक, मासिक धर्म से जुड़ा कलंक इस तकलीफ़ को और भी बदतर बना देता है। यह सोचकर हैरानी होती है कि महिलाओं के लिए यह अनुभव कितना आम है!

लेकिन हम इन वर्जनाओं को तोड़ने और इस चक्र को तोड़ने के लिए यहां हैं - क्योंकि अब बिना किसी बकवास के स्वतंत्र रूप से बहने का समय है! 💪🏼

🩸भारत: “अशुद्ध” रक्त

मिथक: भारत में, मासिक धर्म से जुड़े मिथक बहुत आम हैं, खासकर दिवाली, नवरात्रि या दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक त्योहारों के दौरान। महिलाओं को अक्सर बताया जाता है कि मासिक धर्म के दौरान वे मंदिर नहीं जा सकतीं या किसी धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा नहीं ले सकतीं क्योंकि उन्हें "अशुद्ध" माना जाता है। 😖

हकीकत की जाँच: आइए सच्चाई साफ़ कर दें: मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक क्रिया है, आध्यात्मिक रूप से अयोग्य ठहराने वाली नहीं! शुक्र है कि ज़्यादा लोग इस बकवास को सामने ला रहे हैं, और पूरे भारत में आंदोलन इन पुरानी मान्यताओं को मिटाने के लिए काम कर रहे हैं। 😮‍💨

✨नेपाल: छौपदी

मिथक: छौपदी - मासिक धर्म वाली महिलाओं को एकांत में भेज दिया जाता है, अक्सर असुरक्षित झोपड़ियों में भेज दिया जाता है, यह दावा करते हुए कि मासिक धर्म दुर्भाग्य और अशुद्धता लाता है। 😵 यह विशेष रूप से तिहाड़ के दौरान प्रचलित है।

हकीकत की जाँच: छौपदी गैरकानूनी है, लेकिन कुछ ग्रामीण इलाकों में यह अभी भी हो रही है। कार्यकर्ता इस हानिकारक प्रथा को अतीत की बात बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, क्योंकि महिलाओं को अस्वच्छ शेड में अलग-थलग रखना न केवल अनुचित है, बल्कि बेहद खतरनाक भी है। क्या यह धारणा कि मासिक धर्म दुर्भाग्य लाता है? पूरी तरह से मिथक है।

🪭जापान: जिंक्सिंग सूमो

मिथक: ओबोन जैसे त्योहारों के दौरान मासिक धर्म वाली महिलाएं सूमो कुश्ती मैचों को अशुभ बना सकती हैं 👀

हकीकत की जाँच: ये धारणाएँ पुरानी हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ये सही हैं। मासिक धर्म का भाग्य, कुश्ती या त्योहारों पर कोई असर नहीं पड़ता! युवा पीढ़ी आगे आकर इन पिछड़े अंधविश्वासों को चुनौती दे रही है—क्योंकि अब समय आ गया है कि महिलाएँ इन परंपराओं का पूरा आनंद लें, बिना किसी डर के कि वे अपशकुन बन जाएँ! 🪽

🌙मध्य पूर्व: मासिक धर्म और रमज़ान

मिथक: कई मध्य पूर्वी देशों में, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को रमज़ान के दौरान नमाज़ पढ़ने से मना किया जाता है, क्योंकि मासिक धर्म को 'अशुद्धि का समय' माना जाता है (क्या कोई पैटर्न दिख रहा है?)। हालाँकि रोज़ा छोड़ने की इजाज़त है, लेकिन मासिक धर्म से जुड़े कलंक के कारण अक्सर महिलाओं को पवित्र दिनों में मासिक धर्म होने पर शर्मिंदगी महसूस होती है। 😓

हकीकत की जाँच: हाँ, धार्मिक ग्रंथ महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान उपवास करने की छूट दे सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे आध्यात्मिक रूप से कम योग्य हैं। आइए शर्मिंदगी छोड़ें और समझें कि मासिक धर्म जीवन के प्राकृतिक चक्र का एक और हिस्सा है। 🌀

🎊अफ्रीका: त्योहारों से बहिष्कार

मिथक: मासिक धर्म का रक्त 🚨"खतरनाक"🚨 होता है - यह पुरुषों/योद्धाओं को कमज़ोर करता है, प्रजनन क्षमता या उनकी फसल के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह भी माना जाता था कि यह आध्यात्मिक साधना की शक्ति को कम करता है।

हकीकत की जाँच: ये मान्यताएँ प्राचीन अंधविश्वासों पर आधारित हैं (अगर योद्धाओं ने इसका खुलासा नहीं किया होता), विज्ञान पर नहीं। उस समय, मासिक धर्म के रक्त को "रहस्यमय" माना जाता था - वैज्ञानिक जागरूकता बहुत कम थी। पूरे अफ़्रीका में कार्यकर्ता इस धारणा को बदलने और यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि सांस्कृतिक जीवन के हर पहलू में महिलाओं का स्वागत हो—चाहे महीने का कोई भी समय हो! 🩸🩸🩸

🌱यह बदलाव का समय है

त्यौहारों के मौसम में बहिष्कार का माहौल नहीं होना चाहिए!

भारत से लेकर मध्य पूर्व तक मासिक धर्म से जुड़े मिथकों को 🔨तोड़ दिया जा रहा है, क्योंकि महिलाएं सांस्कृतिक जीवन में पूरी तरह से भाग लेने के अपने अधिकार को पुनः प्राप्त कर रही हैं (जैसा कि उन्हें करना चाहिए!!!)। ⚡

निष्कर्ष? मासिक धर्म प्राकृतिक है, और महिलाओं के पास त्योहारों के दौरान या किसी भी अन्य अवसर पर, विज्ञान द्वारा समर्थित, दरकिनार किए जाने का कोई कारण नहीं है! इन पुरानी वर्जनाओं को त्यागें और बिना किसी शर्म के जश्न मनाएँ - आपके पास इसके लिए हर कारण है! 🥳

स्रोत:

https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC4408698/

https://www.mdpi.com/2077-1444/12/9/749

https://www.worldbank.org/en/topic/water/brief/menstrual-health-and-hygiene

https://www.weforum.org/agenda/2016/05/menstruation-myth-why-are-african-women-still-paying-for-it/

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